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अध्यात्म या गोरखधंधा




जिस कार्य से मनुष्य बुद्धि को नितांत आश्चर्य हो वही चमत्कार , कौतुक , जादू - टोना , करामात करिश्मा जादू टोना कहलाता है । जादू या करामात से लोग क्यों आशाचार्यविंत रह जाते हैं । भारत वर्ष के लिए जादू टोना नया नही है , बंगाल और कामरू का जादू अब तक प्रसिद्ध है । यह दूसरी बात है की लोग अब इनको भद्दे अर्थों में लेने लगे है । 

आप ने बारंबार ये सुना होगा कि किसी ने कहा की आपकी बातों में जादू भरा है । तुम्हारी आंखों में जादू भरा है । यहां जादू शब्द का अर्थ अपूर्व वशीकरण से है ।

यही अपूर्व जादू आज सारे देशों में फैला हुआ है , जिसका दूसरा नाम हिप्नोटिज्म मेस्मोरिजम आदि है ।

आज सभ्यता का समय है सभ्य देश , मेस्मरिज्म जैसी अपूर्व विद्याओं की उत्पत्ति पर गर्व करते हैं ।

ध्यान से देखा जाए तो इन तमाम विद्याओं की उत्पत्ति भारत से ही हुई है ।

आपने भारत में आज भी देखा होगा की कई रोगियों का इलाज करने वाले ऐसे लोग भी है जिनकी विद्या रहस्यात्म है ..

आप अपनी खुद की कुंडलिनी का जागरण करके ये सब बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं लेकिन कुंडलिनी जागरण आसान नहीं है ।

इसके लिए योग्य गुरु का होना नितांत आवश्यक है !

क्रमशः ...

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  सन 17- 31 ई. में आस्ट्रिया देश में एक मनुष्य एंथोनी मेस्मर नामक हुआ इसी मनुष्य ने अपनी विद्या तथा विद्वता से यह बात सिद्ध की कि नभोमंडल के तारे नक्षत्र आदि की जीवधारियों के शारीरिक रंग पट्टों तथा मन आदि से घनिष्ठ संबंध है तथा प्रकृति में आकर्षण शक्ति विद्यमान है , सर्वत्र एक प्रकार का आलोक छाया हुआ है जिसका नाम औडायल है और उसकी उत्पति के लिए शरीर बैटरी है और इसी शरीर रूपी बैटरी से यह आलोक हर समय निकलकर फैलता तथा अपना प्रभाव दिखलाता है ।